सत्यनारायण भगवान के कथा आऊर हम्मर गिलास
एक दिन न सत्यनारायण भगवान के कथा हम्मर घर के बगल में मोहित चा के हिइया रहई। हम होबई लगभग ७-८ साल के। ऊं गाओं घर के सब बच्चा प्रसादी लेबे पहुंच जाइत रहई । हमहू गेलियाई र। ठंण्डा के दिन रहई आ चारो और घनघोर अन्हरिया रात भी रहई त लइका आदिमी डर त लगबे करतई र न । रात के समय लगभग ८ तो बजैत ही होतई। पूजा शुरू हो गेलै र। एहे पूजा के बिच में हम्मर गिलास भुतला गेल र । हम बहुत डरा गेली र और सोचे लगली कि अब कि करम गिलास त भूतला ही गेल , परसदिओं न मिलत आ घर जायेंम त बाबुओ बहुत मारतन । दिमान एकदम काम करना बंद क देलक । अब की करू । और जोर जोर से काने भी लगली । जनने तनने धुरे लगली की हममर गिलास कहाँ भुतला गेल। जईसे जईसे आरती के समय नजदीक अबे लगलै वईसे वईसे हम्मर हालत और ख़राब होय लागल । लेकिन की करती। सब के बार बार उठा उठा क धुरइट रहिअई की कंहू हम्मर गिलास मिल जाय। टॉर्च भी जला जला क देखिली र। उस समय येगो गैस रहैत रहई जेकरा में मिंटर ...